Poetry – Tree

ए – नादान,क्यूं ये धरती को मिटाने चला है..हवाओं में जहर तू घोलने लगा है..ना काट इन पेड़ों को तू,खुद को तबाही के तरफ तू खींचने लगा है… ना मिलेगा छांव , धूप से बचने के लिए..ना नसीब होगी ताजी हवा, खुल के सांस लेने के लिए.. ना हवाएं सरसरायेंगे..ना पंछियों के आवाज से वादियांContinue reading “Poetry – Tree”