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Reservation – Arakshan

इंसान कहलाते हम पर नजाने बटे कितने तरीको से।
कभी धर्म के नाम पे
तो कभी जात के नाम पे…

आज फिर से एक जंग जारी आरक्षण को लेकर..
फिर से बने दुश्मन एक दूसरे के ,जात के आड पर…

सवाल मेरी बस इतनी सी है..
समझो तो बात बस छोटी सी है..
क्यों बने पहले वजह उस आरक्षण के ..
ये वजह क्यूं यादों से छूटी सी है ।

हमने ही बनाया काम को छोटा या बड़ा..
फिर भी क्यूं इंसान है जिद पे अड़ा।
क्यों quarantine में पंडितो ने किया खाने से इनकार..
क्यों आज भी शादियों में जात पात को लेकर होती तकरार।

आरक्षण तो बस एक लकीर है जात पात के बीच में…
बन चुका है ये मुद्दा राजनीति के खेल में।
अगर इन मुद्दों को भुला के सबको एक ही मान लें..
फिर शायद आरक्षण नाम के बीमारी को जड़ से उखाड़ ले।

हो सके तो अपनी सोच बदलो..
देश के तरक्की के खातिर अपना हात बढ़ालो…
फिर होगा नया समाज का निर्माण..
मेहनत करने वालों को ही मिलेगा सम्मान।

Written by prabhamayee parida

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#wapasi

आज फिर से लौट रही हूं उस जगह,
जहां में खुद से रूबरू हुआ था…
मुद्दतों के बाद खुद को सवारा था…
एक आशियाना सजाया था उन अपनों के संग
जिनके साथ होने से खुद को इस काबिल बनाया था..

इस कदर खुस हूं कि आज ये इंतज़ार ख़तम हुआ,
मानो फिर से मेरा नया जन्म हुआ…

वही गलियां होंगे होगा वहीं नज़ारा…
ये मौका को जो अब मिला है फिर ना मिलेगा दोबारा…

अफसोस बस इतनी सी है,
वो यार नहीं होंगे जिनके साथ अनगिनत लम्हे गुजरे थे..
बस याद है वो सरारतें और मस्तियां को साथ बिताए थे…

फिर भी उम्मीद है
वो पल फिर वापस आयेंगे…
वो हसीन पलों के गीत फिर से गुनगुनाएंगे

Written by prabhamayee parida

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#Relationship

As usual a thought came after watching the 2nd season of webseries “Barish”

प्यार एक ऐसा रिश्ता जो सुरु होता है
मासूमियत से भरी एहसास से।

एक दूजे कि कदर करना..
बिन बोले भी समझ लेना..
कीसिकी खूबी या खामियों के साथ
उस रिश्ते को कबूल करना…
शायद ऐसे ही रिश्ते को निभाना होता है,
वक्त के साथ सफर भी यूं आसान हो जाता है।

माना के होते हैं अक्सर उतार – चढाव
इस सफर में,
मगर साथ होने या बात करने से ही सुलझती ये उलझने और बुरे वक्त को बीत जाने में।

नजानें क्यूं कभी ऐसा होता है ??
क्या चाहत से बढ़कर ये पैसा होता है ??
माना के इस भाग – दौड़ भरी दुनिया में
पैसे की एहमियत कुछ इस कदर है..
पर उसे कमाने के जुनून में इंसान हर रिश्ते को भूल जाता है।

Written by prabhamayee parida