New year ( New beginning)

I know i am late to post this poem. But still love to…

एक नया साल, एक नई सदी की शुरुआत होगेई,
कहीं कहानी ख़तम हुई तो कुछ नई कहानी बन गई।

बस यादें रेहगए , कुछ खट्टे कुछ मीठे…
बिगड़े रिश्ते जुड़े कहीं तो ,
कहीं कुछ अपने है रूठे।

इस सदी ने भी नजानें रचे कितने कहानियां..
वक्त के साथ पनपते अरमानों की रवानियां..

ऐसे ही कुछ किस्सों से भरी
मेरे डायरी के पन्ने..
अलफाजों से लिपटी कविताएं
जो सुनाते हजारों सपने..

सच हो ये सपने ,ये जरूरी नहीं..
फिर भी उस सपने को जीने की आश ज़िंदा है कहीं।

Written by prabhamayee Parida

ख़ामोशी – #Silence

क्यूं ये हवा बेरुखी सी है…
राहें भी कुछ धुंधली सी है..
ख़ामोश रहती हूं अक्सर आज कल,
फिर भी सोर सेहनई सी गूंजती है।

झिझक ती हूं बयान करने से…
क्यूं की लोग अक्सर सलाह अपने सहूलियत से देते हैं।
गुजरते हैं हम उलझनों से…
पर चंद बातों से लोग उपाय भी तय करते हैं।

अपने जज्बात जाहिर करने से बेहतर है ख़ामोश रहना…
गुमशुदा ना हो जाए , जरूरी है ख़ामोशी को कलम के लीवाज में रखना।

Written by prabhamayee Parida

#Metime

My thought after watching “House Arrest ” in Netflix. Spend sometime for yourself , you will start loving youself.

कभी खुद के साथ वक्त बिता लेना चाहिए,
खुद से गुप्तगु भी कभी कर लेना चाहिए,
क्यों ना वो पल हो किताबो के साथ….
या हो घंटो पोधौं के संग बात…..
बालकनी से गुजरते लोगों पे गौर फरमाना…
और अजीबो गरीब खयालात दिमाग में लेना…
शायद ये कौशिश जरूरी है
खुद से वाकिफ होना।
थोड़ा सा मुस्किल जरूर मगर नामुमकिन नहीं, तन्हाई में भी खुश रहना।

Written by prabhamayee Parida

#Motivation

जिंदगी सफर बडा, राह भी अजीब हैं।

हर एक मुकाम के लिए, मुश्किलें खडी भी हैं।

इस पथ को चुनू या लौट जाऊं यहां से,
मन के सामने विडम्बना अजीब है।

फिर ख्याल आता कभी, कि क्यूं विराम की तलाश में, मन मचल रहा मेरा

ऊँचाई कितनी भी हो, फासला तय कदम ही करे।
मन जो ठान ले एक बार तो ऊँचाई भी मैदान बनें।

Written by Asha….

Promoting this poem on behalf of a strong woman who shared her message for all.

Kindly help me in sharing her message.

#like #share #comment

Khwahish

तू हर कदम मेरे साथ चले
ये ख्वाहिश कभी ना थी।
तू हर लम्हा मेरे करीब रहे,
ऐसी तकाजा कभी ना थी।

गुज़ारिश बस इतनी सी,
दूर से ही सही, तुझे दीदार करने की इजाजत हो।
नोकझोक भी हो और बातें करे बेसुमर,
बस ऐसी किस्मत हो।

कुछ मांगे तू मुझसे ,
उससे कायम करने की है ये सुरूर।
काश तू याद करे मुझे
कहीं भी रहूं में आऊंगी जरूर।
हो सके तो इस मोहब्बत को पागलपन ना समझना ,
कोई आश नहीं तुझसे फिर भी इश्क है, बस इतना है कसूर।

Written by prabhamayee parida

Crush – unrequited Love

यूँ मोहब्बत होगेई हमें तुमसे,
हुई वो हसीन मुलाकात जिस पल्से,
न इजाजत थी पलको को तुम्हें निहारने की,
फिर भी देखा तुम्हे झुकी निगाहों से।

सोचा न था, खुदा की हमपे रहमत होगी,
इस्क्क़ से फिर यूँ इब्बादत होगी,
नैनो में सजाये सपनो की दुनिया,
इस ज़िंदगी से और शिकायत न होगी।

था खुली आँखों का सपना जो टूट गया,
आँख मिचौली खेलती ये किस्मत फिर रूठ गया,
पता न था वो मंजिल थे किसी और के,
और सफर उस राह से कहीं मूड गया।

Written by Prabhamayee Parida