Adhoori kahani

अब वक्त आ गया,
करूं मैं रुकसत तुझे अपनी यादों से..
आजाद हुई में,
खुद से की गेयी उन कस्मे और वादों से…

तेरा दामन ना छोड़ने का वादा हमने किया था,
तुझसे इस्क़ करने की सजा खुद को दिया था,

या तू सही, या में गलत…
ये तुझे है पता।
माफ़ करना हजूर..
अगर हुई मुझसे कोई खता।

ना थी तेरी मौजूदगी,
ना बन पाएगा मेरी जिंदगी का हिस्सा..
जीकर था तेरा किताबो के पन्नों में,
माफ़ करना ए – जानेमन,
ख़तम करती हूं आज अधूरा ये किस्सा…

Written by prabhamayee Parida

New year ( New beginning)

I know i am late to post this poem. But still love to…

एक नया साल, एक नई सदी की शुरुआत होगेई,
कहीं कहानी ख़तम हुई तो कुछ नई कहानी बन गई।

बस यादें रेहगए , कुछ खट्टे कुछ मीठे…
बिगड़े रिश्ते जुड़े कहीं तो ,
कहीं कुछ अपने है रूठे।

इस सदी ने भी नजानें रचे कितने कहानियां..
वक्त के साथ पनपते अरमानों की रवानियां..

ऐसे ही कुछ किस्सों से भरी
मेरे डायरी के पन्ने..
अलफाजों से लिपटी कविताएं
जो सुनाते हजारों सपने..

सच हो ये सपने ,ये जरूरी नहीं..
फिर भी उस सपने को जीने की आश ज़िंदा है कहीं।

Written by prabhamayee Parida

ख़ामोशी – #Silence

क्यूं ये हवा बेरुखी सी है…
राहें भी कुछ धुंधली सी है..
ख़ामोश रहती हूं अक्सर आज कल,
फिर भी सोर सेहनई सी गूंजती है।

झिझक ती हूं बयान करने से…
क्यूं की लोग अक्सर सलाह अपने सहूलियत से देते हैं।
गुजरते हैं हम उलझनों से…
पर चंद बातों से लोग उपाय भी तय करते हैं।

अपने जज्बात जाहिर करने से बेहतर है ख़ामोश रहना…
गुमशुदा ना हो जाए , जरूरी है ख़ामोशी को कलम के लीवाज में रखना।

Written by prabhamayee Parida

#Metime

My thought after watching “House Arrest ” in Netflix. Spend sometime for yourself , you will start loving youself.

कभी खुद के साथ वक्त बिता लेना चाहिए,
खुद से गुप्तगु भी कभी कर लेना चाहिए,
क्यों ना वो पल हो किताबो के साथ….
या हो घंटो पोधौं के संग बात…..
बालकनी से गुजरते लोगों पे गौर फरमाना…
और अजीबो गरीब खयालात दिमाग में लेना…
शायद ये कौशिश जरूरी है
खुद से वाकिफ होना।
थोड़ा सा मुस्किल जरूर मगर नामुमकिन नहीं, तन्हाई में भी खुश रहना।

Written by prabhamayee Parida