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#wapasi

आज फिर से लौट रही हूं उस जगह,
जहां में खुद से रूबरू हुआ था…
मुद्दतों के बाद खुद को सवारा था…
एक आशियाना सजाया था उन अपनों के संग
जिनके साथ होने से खुद को इस काबिल बनाया था..

इस कदर खुस हूं कि आज ये इंतज़ार ख़तम हुआ,
मानो फिर से मेरा नया जन्म हुआ…

वही गलियां होंगे होगा वहीं नज़ारा…
ये मौका को जो अब मिला है फिर ना मिलेगा दोबारा…

अफसोस बस इतनी सी है,
वो यार नहीं होंगे जिनके साथ अनगिनत लम्हे गुजरे थे..
बस याद है वो सरारतें और मस्तियां को साथ बिताए थे…

फिर भी उम्मीद है
वो पल फिर वापस आयेंगे…
वो हसीन पलों के गीत फिर से गुनगुनाएंगे

Written by prabhamayee parida

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Life in city / village

This poem is inspired by the webseries panchayat.

आज तकदीर ने ये कैसा मोड़ लाया है,
शहर छोड़ कर गांव में खुदको पाया है।

सुरुवात का दौर था घुटन से भरा,
सजा थी या कुछ और कोई बतादो जरा।

शहर की बेपरवाह जिंदेगी याद आती हमे,
वीकेंड्स के लेट नाइट पार्टीज फिर बुलाती हमे।

चौड़े से सड़के
या ऊंची ऊंची इमारतें…
रिश्तों के नाम पे
सोशियल मीडिया में हैं पनपते…
शहर की याद यूं सताती रही
मानो लौट आने को पुकारती रही।

मजबूरी ही सही,
वक्त बीतता चला गांव के बादियों में..
खुद को भुला चुकी हूं
नदी के किनारे या हरियाली खेतों में।

सादगी सी भरा जींदेगी और
पलकों में बड़े सपने यहां आज भी है..
जीवन शैली शहर जैसा तो नहीं
पर रिश्तों कि कदर और अपनों वाली बातें आज भी है…

फिर से शहर को भूलने लगी हूं…
गांव के मेट्टी में खोने लगी हूं…
शायद ना हो अनगिनत पैसा या ऋतवा,
अपने गांव के लिए कुछ कर सकूं , ये उम्मीद रखती हूं।

Written by prabhamayee parida

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Friendship – yaari

Dedicated to all those special friends of my life  who love me the way I am .

अक्सर इस बात का अबसोस मनाया करती..
हमेशा इस दुनिया की सिकायत किया करती..

नज़ाने क्यूं लगता था, कोई साथ ही नहीं है..
इस बात से डरती थी, कहीं कोई खफा तो नहीं है..

पर आज ये एहसास हुआ कि,
कभी अकेले में थी ही नहीं…
कुछ खास थे वो अपने
जिनसे कभी दूर हुए ही नहीं…

हर कदम पर कोई यार मिला मुझे …
अनजाने में ही सही, उनका साथ मिला मुझे…
माना कि गलती हुई अक्सर लोगों को समझने में..
पर इन यारों से बेहिसाब प्यार मिला मुझे..

आज तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूं..
ये जिंदगी उन यारों के नाम करती हूं..
गिने चुने कुछ ही दोस्त हैं मेरे..
दा- उम्र इस यारी को निभाने का वादा करती हूं…

Written by prabhamayee parida

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यकीन – Trust

आज फिर मैं एक बार खुद को टटोल रही हूं,
आज फिर अपने फैसलों पे सवाल कर रही हूं।

क्या इतना आसान है, हर किस्से को मिटा पाना..
क्या इतना आसान है, बीते हादसों को भूल जाना…

कहते हैं गलती एक बार होती है,
बार बार नहीं…
फिर से किसिपे यकीन करूं,
शायद मुझमें वो हिम्मत नहीं…

टूट के बिखरी थीं सौ टुकड़ों में,
बड़ी मुश्किल से अब जुड़ी हूं…
या रहूं अकेले उम्र भर ,
या फिर खुदगर्ज बन चुकी हूं…

Written by prabhamayee parida

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A movie review- the taskent files

Today I watched a movie “the taskent files”. I guess hardly anyone have watched it.
Initially I thought I will be bored. But when I finished watching, I was in a different zone. This movie is about India’s 2nd prime minister Dr. Lal Bahadur Shastri’s mysterious death. I got to know so many stuffs related to politics , constitution and also facts. I hate politics so I am not in support of any perticular party. But it clears one thing , what we read in history about our past , it’s not necessary to be the truth. In our childhood , we read all positive things about Gandhi ji, Nehru ji and half truth of freedom and India-Pakistan division. But few names were disappeared slowly whether it’s about shastri ji or netaji bosh and so on.
When I start knowing the truths then I realised that our educational system includes the truth and facts for every leader or freedom fighter and it should not be matter ,how harsh the truth is.

With this message some political party lovers may considered me anti-national, but I can’t avoid with the facts written of Nathuram godse and also the death of shastri ji & netaji. So my respect for so called leaders (political leaders) is diminishing and I expect the current generation to be aware of the naked truth rather than the theories mentioned in history books.
I really hate politics and also their thinking and lifestyle. People say “choose your own govt” by voting but that’s not exactly what happens. They made us choose . After watching this movie, I bound to be hated these politics strongly.

Why is it so dangerous to be a political leader ?? Why can’t be a normal & decent people after entering to politics considered as “one of the us”.

Pls do share your opinions ?

Written by prabhamayee parida

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#homealone #metime

बीत गया ये हफ्ता
मकान के चार दीवारों में…
तनहा नहीं थी पर,
इन दिनों मसरूफ जरूर थे खुद में…

अब तो लगता है नाजाने
कैद हैं कितने औरसों से…
वक्त बीतेगी कैसे यूं अकेले
डर गए थे इस खयाल से…
पर लम्हा गुजरता गया और
हमें पता भी ना चला..
ये एहसास पहले कभी हुआ तो नहीं
शायद चाहने लगे हैं हम खुद से…

ये बंदिश भी अच्छा लगने लगा है..
अब तो वक्त भी कम पड़ने लगा है..
गुमान था थोड़ा , पर अब यकीन हो चला है..
किसिकी कमी अब हमे मेहसूस ना होता है..

Written by prabhamayee parida