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#wapasi

आज फिर से लौट रही हूं उस जगह,
जहां में खुद से रूबरू हुआ था…
मुद्दतों के बाद खुद को सवारा था…
एक आशियाना सजाया था उन अपनों के संग
जिनके साथ होने से खुद को इस काबिल बनाया था..

इस कदर खुस हूं कि आज ये इंतज़ार ख़तम हुआ,
मानो फिर से मेरा नया जन्म हुआ…

वही गलियां होंगे होगा वहीं नज़ारा…
ये मौका को जो अब मिला है फिर ना मिलेगा दोबारा…

अफसोस बस इतनी सी है,
वो यार नहीं होंगे जिनके साथ अनगिनत लम्हे गुजरे थे..
बस याद है वो सरारतें और मस्तियां को साथ बिताए थे…

फिर भी उम्मीद है
वो पल फिर वापस आयेंगे…
वो हसीन पलों के गीत फिर से गुनगुनाएंगे

Written by prabhamayee parida

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#Relationship

As usual a thought came after watching the 2nd season of webseries “Barish”

प्यार एक ऐसा रिश्ता जो सुरु होता है
मासूमियत से भरी एहसास से।

एक दूजे कि कदर करना..
बिन बोले भी समझ लेना..
कीसिकी खूबी या खामियों के साथ
उस रिश्ते को कबूल करना…
शायद ऐसे ही रिश्ते को निभाना होता है,
वक्त के साथ सफर भी यूं आसान हो जाता है।

माना के होते हैं अक्सर उतार – चढाव
इस सफर में,
मगर साथ होने या बात करने से ही सुलझती ये उलझने और बुरे वक्त को बीत जाने में।

नजानें क्यूं कभी ऐसा होता है ??
क्या चाहत से बढ़कर ये पैसा होता है ??
माना के इस भाग – दौड़ भरी दुनिया में
पैसे की एहमियत कुछ इस कदर है..
पर उसे कमाने के जुनून में इंसान हर रिश्ते को भूल जाता है।

Written by prabhamayee parida

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Life in city / village

This poem is inspired by the webseries panchayat.

आज तकदीर ने ये कैसा मोड़ लाया है,
शहर छोड़ कर गांव में खुदको पाया है।

सुरुवात का दौर था घुटन से भरा,
सजा थी या कुछ और कोई बतादो जरा।

शहर की बेपरवाह जिंदेगी याद आती हमे,
वीकेंड्स के लेट नाइट पार्टीज फिर बुलाती हमे।

चौड़े से सड़के
या ऊंची ऊंची इमारतें…
रिश्तों के नाम पे
सोशियल मीडिया में हैं पनपते…
शहर की याद यूं सताती रही
मानो लौट आने को पुकारती रही।

मजबूरी ही सही,
वक्त बीतता चला गांव के बादियों में..
खुद को भुला चुकी हूं
नदी के किनारे या हरियाली खेतों में।

सादगी सी भरा जींदेगी और
पलकों में बड़े सपने यहां आज भी है..
जीवन शैली शहर जैसा तो नहीं
पर रिश्तों कि कदर और अपनों वाली बातें आज भी है…

फिर से शहर को भूलने लगी हूं…
गांव के मेट्टी में खोने लगी हूं…
शायद ना हो अनगिनत पैसा या ऋतवा,
अपने गांव के लिए कुछ कर सकूं , ये उम्मीद रखती हूं।

Written by prabhamayee parida

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Friendship – yaari

Dedicated to all those special friends of my life  who love me the way I am .

अक्सर इस बात का अबसोस मनाया करती..
हमेशा इस दुनिया की सिकायत किया करती..

नज़ाने क्यूं लगता था, कोई साथ ही नहीं है..
इस बात से डरती थी, कहीं कोई खफा तो नहीं है..

पर आज ये एहसास हुआ कि,
कभी अकेले में थी ही नहीं…
कुछ खास थे वो अपने
जिनसे कभी दूर हुए ही नहीं…

हर कदम पर कोई यार मिला मुझे …
अनजाने में ही सही, उनका साथ मिला मुझे…
माना कि गलती हुई अक्सर लोगों को समझने में..
पर इन यारों से बेहिसाब प्यार मिला मुझे..

आज तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूं..
ये जिंदगी उन यारों के नाम करती हूं..
गिने चुने कुछ ही दोस्त हैं मेरे..
दा- उम्र इस यारी को निभाने का वादा करती हूं…

Written by prabhamayee parida