Poem, quotes, Uncategorized

यकीन – Trust

आज फिर मैं एक बार खुद को टटोल रही हूं,
आज फिर अपने फैसलों पे सवाल कर रही हूं।

क्या इतना आसान है, हर किस्से को मिटा पाना..
क्या इतना आसान है, बीते हादसों को भूल जाना…

कहते हैं गलती एक बार होती है,
बार बार नहीं…
फिर से किसिपे यकीन करूं,
शायद मुझमें वो हिम्मत नहीं…

टूट के बिखरी थीं सौ टुकड़ों में,
बड़ी मुश्किल से अब जुड़ी हूं…
या रहूं अकेले उम्र भर ,
या फिर खुदगर्ज बन चुकी हूं…

Written by prabhamayee parida