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#homealone #metime

बीत गया ये हफ्ता
मकान के चार दीवारों में…
तनहा नहीं थी पर,
इन दिनों मसरूफ जरूर थे खुद में…

अब तो लगता है नाजाने
कैद हैं कितने औरसों से…
वक्त बीतेगी कैसे यूं अकेले
डर गए थे इस खयाल से…
पर लम्हा गुजरता गया और
हमें पता भी ना चला..
ये एहसास पहले कभी हुआ तो नहीं
शायद चाहने लगे हैं हम खुद से…

ये बंदिश भी अच्छा लगने लगा है..
अब तो वक्त भी कम पड़ने लगा है..
गुमान था थोड़ा , पर अब यकीन हो चला है..
किसिकी कमी अब हमे मेहसूस ना होता है..

Written by prabhamayee parida