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#Reality

An incident which actually inspired me alot.

अक्सर मैं अपनी तकलीफों से रोती,
जो मांगा, क्यूं ना मिला ये अब्सोस मनाती,

पर आज जब आंख खुली और नजर घुमाया चारो ओर,
उन लोगों की बेबसी गूंजे बार बार बनके शोर।

सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान है उसका,
खुले छत की दुकान बनगया था मकान उसका।

उलझन हुई इस दिल को तो हमने आखिर पूछ ही लिया,
ये सर्द भरी रात और खुली आसमान को हमसफर क्यूं बनाया?

अपनी मुश्किलों को मुस्कुराहट के लीवाज पे छुपाते हुए,
“ऐसे ही जी लेते हैं” जवाब दिया अपनी किस्मत को गले लगाते हुए,
हर हाल में खुश रहना तो जिंदगी है,ये अब समझा हमने,
एक ही पल में, सपनों के दुनिया से निकल के आखिर हकीकत से वाकिब जो हुए।

Written by prabhamayee parida