Poem

I just Wish

Kash -1

काश हुम् आज ये काश न कहते,
बीते हुए वक़्त के पन्ने पलट पाते,
सीसे में जब हमने खुदको तरसा,
सोचा काश हुम् अपनी किस्मत बदल पाते।

हुई हमसे गलतियां ,
काश हुम् ये उस पल समझ पाते,
अनसुनी की हमने अपनो की सलाह,
काश सच्चाई को तब मान ही लेते,
ज़िंदगी कुछ और होती अब,
काश दिल के बदले हुम् दिमाग की सुन लेते।

Kash -2

काश तुमसे हुम् मिले न होते,
काश हमे तुमसे प्यार न होता ।

काश हिम्मत होती इक़रार करने की,
काश इनकार से ये दिल न डरता।
होते हो जब साथ मेरे,
काश वो पल यूँही थम जाता।
कुछ कदम तुम्हारे साथ चलना चाहूँ,
ये दिल भी तुमसे गुजारिस न करता।

काश हम इजहार कर पाते
इस काश में कहीं वक़्त गुज़रना जाए।
फिर अचानक हो मुलाकात बरसो के बाद,
तब ये काश फिर कहीं काश न रहजाये।

Written by Prabhamayee Parida